अचलपुर: स्थानीय राजनीति में इस वक्त की सबसे बड़ी और सनसनीखेज खबर अचलपुर नगर निगम चुनाव 2025 के मैदान से आ रही है। राजनीति के धुरंधर माने जाने वाले ज़ाहिद खान ने इस बार एक ऐसा बड़ा और अप्रत्याशित फैसला लिया है, जिसने विरोधी खेमों में हलचल मचा दी है। यह फैसला सिर्फ एक उम्मीदवारी नहीं, बल्कि ज़ाहिद खान की सियासी रणनीति का एक नया अध्याय प्रतीत होता है।
वार्ड क्रमांक 16, अशरफपुरा, जो हमेशा से ही अचलपुर की राजनीति का एक अहम केंद्र रहा है, इस बार एक 'न्यूज़मेकर' वार्ड बन गया है। ज़ाहिद खान ने घोषणा की है कि इस वार्ड से आगामी नगर निगम चुनाव 2025 के लिए उनकी ओर से उनकी पत्नी, नाज़िया अंजुम ज़ाहिद खान चुनावी मैदान में खड़ी रहेंगी।
'नई बीवी की जोड़ी' का जलवा: ज़ाहिद खान की रणनीति
राजनीति में अक्सर पति-पत्नी का एक साथ आना कोई नई बात नहीं है, लेकिन ज़ाहिद खान जैसे मंजे हुए खिलाड़ी का यह कदम कई मायनों में ख़ास है। चुनावी गलियारों में अब हर किसी की निगाहें ज़ाहिद खान और नाज़िया अंजुम ज़ाहिद खान की इस 'नई बीवी की जोड़ी' पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह जोड़ी अशरफपुरा, वार्ड 16 के मतदाताओं का भरोसा जीतने में कितनी कामयाब हो पाती है।
ज़ाहिद खान का नाम और उनकी सक्रियता इस पूरी चुनावी प्रक्रिया का केंद्र बनी हुई है। वह अपनी राजनीतिक विरासत को किस मज़बूती से आगे बढ़ाना चाहते हैं, यह फैसला उसी का संकेत है।
आचार संहिता लागू: चुनावी गर्मी हुई तेज़
अचलपुर नगर सेवक चुनाव के लिए माहौल पूरी तरह से गर्म हो चुका है। चुनाव आयोग ने दिनांक 4 नवंबर 2025 से ही आचार संहिता को सख्ती से लागू कर दिया है। आचार संहिता लागू होने के बाद अब प्रचार, चुनावी रैलियों और गतिविधियों में तेज़ी आ गई है, लेकिन साथ ही सभी को नियमों का पालन भी करना पड़ रहा है।
वार्ड 16 में अब चुनावी सरगर्मी शिखर पर है। नाज़िया अंजुम ज़ाहिद खान की उम्मीदवारी ने मुकाबले को और भी कड़ा बना दिया है। ज़ाहिद खान, जो अपने समर्थकों के बीच एक बड़ा नाम और प्रभावशाली व्यक्तित्व रखते हैं, अब अपनी पत्नी के लिए हर गली, हर नुक्कड़ पर प्रचार करते दिखाई देंगे। यह मुकाबला अब ज़ाहिद खान की प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जा रहा है।
चुनावी जंग और ज़ाहिद खान के मास्टरस्ट्रोक के समीकरण
ज़ाहिद खान का यह फैसला अचानक नहीं लिया गया होगा। यह एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ज़ाहिद खान ने इस कदम से कई समीकरणों को साधने की कोशिश की है:
- वोटों का ध्रुवीकरण: ज़ाहिद खान का व्यक्तिगत प्रभाव और उनकी पत्नी की उम्मीदवारी मिलकर एक बड़ा वोट बैंक तैयार कर सकती है।
- विरोधी खेमे में संशय: इस अप्रत्याशित कदम ने विरोधी दलों को अपनी रणनीति पर फिर से विचार करने पर मजबूर कर दिया है, क्योंकि ज़ाहिद खान ने उन्हें तैयारी करने का कम समय दिया है।
- महिला मतदाताओं पर फोकस: नाज़िया अंजुम ज़ाहिद खान की उम्मीदवारी से महिला मतदाताओं के बीच एक सकारात्मक संदेश जा सकता है, जिसका फायदा सीधे चुनाव में मिलेगा और ज़ाहिद खान को एक नया आधार मिलेगा।
ज़ाहिद खान और नाज़िया अंजुम ज़ाहिद खान की टीम ने अभी से ज़मीनी स्तर पर काम शुरू कर दिया है। जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं को सुनना और समाधान का आश्वासन देना, उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है।
आगे की राह: क्या होगा 'नई जोड़ी' का असर?
अशरफपुरा, वार्ड 16 के चुनावी इतिहास को देखते हुए, हर चुनाव एक नया मोड़ लेकर आता है। इस बार, यह मोड़ ज़ाहिद खान ने खुद तय किया है। उनकी पत्नी के रूप में एक नया चेहरा सामने लाना, जबकि ज़ाहिद खान खुद बैकग्राउंड से पूरी कमान संभालेंगे, एक प्रभावशाली संयोजन साबित हो सकता है।
आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि क्या नाज़िया अंजुम ज़ाहिद खान की उम्मीदवारी ज़ाहिद खान की सियासी विरासत को और मज़बूत कर पाएगी। आचार संहिता लागू होने के बाद, अब प्रचार का दौर अपने चरम पर पहुंचेगा। अचलपुर नगर निगम चुनाव 2025 का यह मुकाबला यकीनन अचलपुर की राजनीति के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय साबित होगा।
वार्ड 16 के मतदाता 4 नवंबर से लागू हुई आचार संहिता के बीच, इस 'नई जोड़ी' पर अपना विश्वास जताते हैं या नहीं, यह तो चुनावी नतीजों से ही पता चलेगा। लेकिन यह तय है कि ज़ाहिद खान ने इस चुनाव को अपने लिए एक चुनौतीपूर्ण प्रतिष्ठा का प्रश्न बना दिया है।
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