महाराष्ट्र के अचलपुर शहर की राजनीति इस समय उफान पर है। नगर निगम चुनाव, जो कई वर्षों से लंबित थे, अब जाकर होने जा रहे हैं। इस लंबे अंतराल के बाद, जब हर वार्ड में गुटबाजी और उठा-पटक का दौर शुरू हो गया है, वहीं डॉ. ज़ाकिर हुसैन वार्ड क्र.14 इस समय शहर की सियासी सुर्खियों में सबसे ऊपर है। इसकी वजह कोई और नहीं, बल्कि भावी नगर सेवक पद के लिए ताल ठोक रहे पूर्व नगर सेवक शमशेर खान 'पप्पू पठान' हैं।
4 नवंबर 2025 से पूरे अचलपुर में आचार संहिता (Code of Conduct) लागू हो चुकी है। आमतौर पर, संहिता लागू होते ही प्रचार की रफ्तार धीमी पड़ जाती है, लेकिन वार्ड-14 में माहौल बिल्कुल उलट है। पप्पू पठान की टीम ने आचार संहिता के नियमों का पूरी तरह से पालन करते हुए भी, अपनी रणनीति को इस तरह से बदला है कि जमीनी स्तर पर उनका प्रचार आग की तरह फैल रहा है। सार्वजनिक सभाएं भले ही धीमी हो गई हों, लेकिन डोर-टू-डोर कैंपेनिंग और साइलेंट मीटिंग्स ने विपक्ष की नींद उड़ा दी है।
शमशेर खान की वापसी: हिसाब या बदलाव?
शमशेर खान, जिन्हें उनके समर्थक 'बिस्मिल्ला खान' और 'पप्पू पठान' के नाम से जानते हैं, को इस वार्ड में एक जाना-पहचाना नाम माना जाता है। यह बात पूरी तरह स्पष्ट है कि शमशेर खान पहले भी नगर सेवक रह चुके हैं, और उनका यह चुनाव एक अनुभवी नेता की सालों बाद वापसी है। यह पहला मौका है कि अचलपुर की जनता को इतने सालों बाद अपना प्रतिनिधि चुनने का मौका मिला है, और इसी मौके पर पप्पू पठान की वापसी ने मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना दिया है।
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि उनकी यह वापसी सिर्फ चुनाव लड़ना नहीं है, बल्कि अधूरे रह गए विकास कार्यों को पूरा करने का संकल्प है। जनता के बीच अब दोहरी चर्चा है: क्या पप्पू पठान अपना पिछला कार्यकाल पूरा करने वापस आए हैं, या यह लंबा ब्रेक उनकी लोकप्रियता को प्रभावित करेगा? उनकी एंट्री एक अनुभवी खिलाड़ी की तरह हुई है, जो पुराने तौर-तरीकों और चुनौतीपूर्ण राजनीतिक गलियारों को अच्छी तरह से समझते हैं।
हम जानते हैं कि वह काम कर सकते हैं। सवाल यह है कि क्या इस बार उन्हें पूरा मौका मिलेगा, क्योंकि वार्ड की समस्याएँ सालों से जस की तस हैं।
विपक्ष की रणनीति धड़ाम: अनुभव का मुकाबला कैसे करें?
पप्पू पठान की अचानक और जोरदार वापसी ने वार्ड 14 के नए और स्थापित दोनों राजनेताओं को गहरे सदमे में डाल दिया है। वर्षों बाद चुनाव होने के कारण जो नए उम्मीदवार मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे थे, उनके सामने अब अनुभवी पप्पू पठान की चुनौती है।
अंदरूनी सूत्रों के हवाले से खबर है कि विपक्षी खेमे में इस समय गुप्त बैठकों का सिलसिला जारी है। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि पप्पू पठान के अनुभव का मुकाबला कैसे किया जाए, क्योंकि उन्हें न तो किसी व्यक्तिगत घोटाले में फँसाया जा सकता है और न ही उनकी पिछली लोकप्रियता को कम आंका जा सकता है। एक विपक्षी उम्मीदवार के करीबी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "पप्पू पठान की एंट्री ने हमारे सारे समीकरण बिगाड़ दिए हैं। हम यह भी जानते हैं कि जनता अब पिछली नाकामी का हिसाब भी मांग सकती है, लेकिन उनकी वापसी ही अपने आप में एक लहर है।"
वार्ड-14: वर्षों से लंबित, अब ज़रूरी विकास के मुद्दे
डॉ. ज़ाकिर हुसैन वार्ड क्र.14 अचलपुर के सबसे समस्याग्रस्त वार्डों में से एक माना जाता है। सालों तक नगर सेवक न होने या रुके हुए विकास के कारण यहां की स्थिति गंभीर है। पप्पू पठान ने अपने प्रचार का आधार जिन कोर-इश्यूज़ को बनाया है, वे सीधे तौर पर आम आदमी की वर्षों पुरानी परेशानियों से जुड़े हैं:
- अधूरे प्रोजेक्ट्स पर फ़ोकस: पप्पू पठान का मुख्य वादा है कि उनके पिछले कार्यकाल में जो विकास योजनाएं शुरू हुई थीं, लेकिन चुनाव न होने के कारण अटक गईं, उन्हें प्राथमिकता पर पूरा किया जाएगा।
- जर्जर सड़कें और सीवरेज का नर्क: वार्ड की गलियों में खराब सड़कें और रुका हुआ सीवरेज सिस्टम जो सालों से ठीक नहीं हुआ, उसे अनुभव के दम पर जल्दी ठीक करने का वादा।
- युवाओं के लिए रोज़गार: स्थानीय युवाओं के लिए रुके हुए विकास को गति देते हुए रोज़गार के अवसर पैदा करने और कौशल विकास केंद्र स्थापित करने का वादा।
विशेषज्ञों की राय: चुनावी गलियारों में यह माना जा रहा है कि पप्पू पठान की वापसी वार्ड-14 की लड़ाई को हाई-प्रोफाइल बना देगी। अब मुकाबला सिर्फ वादों का नहीं, बल्कि पिछले और आने वाले कार्यकाल के हिसाब का होगा।
निष्कर्ष: परिणाम की घड़ी
अचलपुर नगर सेवक चुनाव में डॉ. ज़ाकिर हुसैन वार्ड क्र.14 की लड़ाई अब अनुभवी नेता शमशेर खान 'पप्पू पठान' और उनके अधूरे वादों/कार्यों के बीच का सीधा मुकाबला बन गया है।
आचार संहिता के सख्त पहरे में, पप्पू पठान अपनी अनुभव, रणनीति और जनता से सीधे जुड़ाव के दम पर किस तरह इतिहास रचते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा। क्या अचलपुर की राजनीति में पुराने अनुभवी नेतृत्व की सफलतापूर्वक वापसी होगी? परिणाम ही तय करेगा कि पप्पू पठान का यह धमाकेदार दांव कितना सफल होता है।
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